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AKHRA 2nd Central Conference 23-24 April 2010 Ranchi, Jharkhand
झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा महासम्मेलन संपन्न
झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा की ओर से आयोजित दो दिवसीय महासम्मेलन में जनजातीय भाषाओं को बचाने की चिंता साफ नजर आई। शुक्रवार को सत्र का उद्घाटन करते हुए स्तंभकार व दलित चिंतक सुभाष गाताड़े ने मुंडारी गीत की पंक्तियों से शुरुआत करते हुए कहा कि शिक्षा का माध्यम मातृभाषा होनी चाहिए। बिना इसके विकास संभव नहीं है। इसके लिए जरूरी कि मातृभाषाओं में साहित्य लेखन ही न हो, बल्कि विज्ञान लेखन भी हो। अध्यक्षता करते हुए डा. रोज केरकेट्टा ने कहा कि भाषा हथियार के रूप में मौजूद है। हमें अपने हक के लिए इसका इस्तेमाल करना चाहिए। हमें अपनी संस्कृति, अपनी भाषा, अपने साहित्य को लेकर लोगों को जागरूक करने की जरूरत है।